“शिक्षक के अनेक रूप “

कचरे के ढेर से सब्जी उठाते हुए उस महिला से सीखा ,
जिंदगी में मुसीबतो से ना हारना ll

बाजार की भीड़ में एक बच्चे के कंधे पर कूड़े का थैला देखकर सीखा ,
साधनो का सही इस्तेमाल करना ll

सड़क के किनारे बहुत अधिक उम्र के बाबा को खिलौने बेचते देखकर सीखा ,
बड़ो का आदर करना ll

भाइयो को घर के टुकड़े करते हुए देखकर सीखा ,
भाइयो से दोस्ती करना ll

माँ बाप से हर गलती पर डाँट खाकर सीखा ,
सही और गलत में अंतर करना ll

दादी माँ का इस दुनिया से चले जाने पर सीखा ,
कभी किसी से वैर ना रखना ll

कड़ी धूप में ,भूखे प्यासे रहकर मेहनत करते किसान को देखकर सीखा ,
जीवन में मेहनत करने से कभी ना घबराना ll

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