” याद आ गया “

जहाज में सफर करते हुए ना जाने क्यूं ,
साइकिल की चेन का उतरना याद आ गया ll

थाली में रोटी छोड़ते हुए ना जाने क्यों ,
कचरे के ढेर से उस महिला का रोटी चुनना याद आ गया ll

पढ़ाई से थक कर किताब रखते हुए ना जाने क्यों ,
उस मासूम के कंधे पर रखा बोझ याद आ गया ll

अपनी जिम्मेदारियों से भागते हुए ना जाने क्यूं ,
सीमा पर तैनात जवान याद आ गया ll

खुद के सपने का पीछा करते हुए न जाने क्यूं ,
मां-बाप का वह सपना याद आ गया ll

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