भारत बना दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, वर्ष 2025 तक होगा 5 वें स्थान पर

भारत वर्ष, 2019 में यूनाइटेड किंगडम से आगे निकल कर, दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था, लेकिन वर्ष, 2020 में वापस छठे स्थान पर पहुंच गया है.

सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (CEBR) द्वारा 26 दिसंबर, 2020 को प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष, 2025 तक भारत दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.

भारत वर्ष, 2019 में यूनाइटेड किंगडम से आगे निकल कर, दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था, लेकिन वर्ष, 2020 में वापस छठे स्थान पर पहुंच गया है. भारत अब वर्ष, 2025 तक इंग्लैंड  से आगे निकल जाएगा और भारत के बारे में वर्ष, 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भविष्यवाणी भी की जा रही है.

यूके-आधारित थिंक टैंक, CEBR ने आगे यह अनुमान भी लगाया है कि, कोविड ​​-19 महामारी के प्रभाव से उबरने की इन दोनों देशों की विषम नीतियों के कारण चीन पांच साल पहले ही, वर्ष, 2028 तक अमेरिका से आगे निकल जाएगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

दूसरी ओर, जापान वर्ष, 2030 के दशक की शुरुआत तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, जब भारत इससे आगे निकल जाएगा, तब जापान जर्मनी को चौथे से पांचवें स्थान पर धकेल देगा.

मुख्य विशेषताएं

• CEBR के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था कोविड -19 संकट से आए झटके से पहले ही अपनी गति खो रही थी.
• भारत की GDP वृद्धि दर वर्ष, 2019 में दस साल के निचले स्तर 4.2 प्रतिशत से अधिक गिर गई, जो वर्ष, 2018 में 6.1 प्रतिशत से कम हो गई थी और वर्ष, 2016 में लगभग 8.3 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई थी. 
• CEBR की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में कमजोरी, सुधारों के समायोजन और वैश्विक व्यापार में गिरावट सहित विभिन्न कारकों के एकत्रित होने के परिणामस्वरूप भारत की धीमी आर्थिक वृद्धि हुई है.
• थिंक टैंक ने आगे यह कहा कि, कोविड -19 महामारी भारत के लिए एक बड़ी मानवीय और आर्थिक आपदा रही है, जिसमें दिसंबर, 2020 के मध्य तक 1,40,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं.
• हालांकि, प्रतिबंध हटाए जाने पर भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों ने पुनरुद्धार दिखाया है, लेकिन अभी भी उत्पादन पूर्व-महामारी के स्तर से बहुत नीचे है.

धीमी गति से होगा सुधार

हालांकि, भारत के कृषि क्षेत्र ने विकास दर्शाया है, जो भारत में आर्थिक सुधार का एक महत्वपूर्ण कारक  है.

कोविड -19 टीकाकरण कार्यक्रम के मामले में भी भारत कई विकासशील देशों की तुलना में बेहतर है, क्योंकि यह दुनिया के अधिकांश टीकों का निर्माता है और भारत में 42 साल से टीकाकरण कार्यक्रम चालू है जो हर साल 55 मिलियन लोगों का टीकाकरण करता है.

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